History
Fact Chronology
| Dates | Description |
|---|---|
| 2500 – 1750 ई.पू. |
पूर्व हड़प्पा काल
रेडियो कार्बन-14 से अनुमानित
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| 1500 – 1000 ई.पू. |
ऋग-वैदिक युग
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| 1000 – 600 ई.पू. |
उत्तर-वैदिक युग
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| 544 – 412 ई.पू. |
हर्यक वंश
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| 413 – 344 ई.पू. |
मगध पर शिशुनाग राजवंश का आधिपत्य
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| 322 – 185 ई.पू. |
मौर्य राजवंश का शासन
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| 185 – 73 ई.पू. |
शुंग वंश
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| 73 – 28 ई.पू. |
कण्व वंश
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| 30 – 375 ई. |
कुषाण वंश
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| 1782 ई. |
सालबाई की संधि
तिथि – 17 मई 1782
प्रभावी अवधि – 1782 से 1802 तक शांति पृष्ठभूमि – प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का अंत संबद्ध पक्ष – मराठा साम्राज्य और ईस्ट इंडिया कंपनी प्रमुख व्यक्ति – महादजी शिंदे, नाना फडणवीस, वॉरेन हेस्टिंग्स मुख्य शर्त – अंग्रेजों द्वारा माधवराव नारायण को पेशवा के रूप में मान्यता |
| 1784 ई. |
एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की स्थापना
तिथि – 15 जनवरी 1784 से वर्तमान
स्थापना स्थल – कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) संस्थापक – सर विलियम जोन्स संबद्ध व्यक्ति – हेनरी थॉमस कोलब्रुक, जेम्स प्रिंसेप उद्देश्य – एशिया के इतिहास, भाषा, साहित्य, विज्ञान का अध्ययन महत्व – भारत में आधुनिक ऐतिहासिक एवं भाषाई शोध की शुरुआत मुख्य योगदान – संस्कृत, फारसी, अरबी ग्रंथों का अध्ययन व संरक्षण प्रकाशन – एशियाटिक रिसर्चेज़ अन्य तथ्य – 1834 में नाम बदलकर Asiatic Society, एशियाई अध्ययन का प्रमुख केंद्र |
| 1829 ई. |
चिटगांव शस्त्रागार छापा
तिथि – 18 अप्रैल 1930
स्थान – चिटगांव (वर्तमान चटग्राम, बांग्लादेश) संबद्ध नेता – सूर्य सेन, प्रीतिलता वादेदार, कल्पना दत्त उद्देश्य – ब्रिटिश शस्त्रागार पर कब्ज़ा, औपनिवेशिक शासन को सशस्त्र चुनौती महत्व – सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन का साहसिक उदाहरण स्वरूप – सशस्त्र हमला, गुरिल्ला युद्ध शैली अन्य तथ्य – यूरोपीय क्लब पर हमला, टेलीग्राफ लाइनों की कटौती, सूर्य सेन को 1934 में फांसी |
| 1855 – 1856 ई. |
संथाल विद्रोह
आरंभ तिथि – 30 जून 1855 - 1856
क्षेत्र – संथाल परगना (वर्तमान झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल) संबद्ध नेता – सिद्धू कान्हू, कान्हू मुर्मू, चाँद मुर्मू, भैरव मुर्मू उद्देश्य – ब्रिटिश शासन, जमींदारी प्रथा, महाजनी शोषण का विरोध स्वरूप – आदिवासी जन आंदोलन, सशस्त्र विद्रोह प्रीलिम्स उपयोगी तथ्य – संथालों द्वारा इसे ‘हूल’ कहा गया, जमींदार–महाजन–अंग्रेज त्रिकोणीय शोषण के विरुद्ध विद्रोह, 1857 से पहले का प्रमुख आदिवासी विद्रोह, दमन में सेना और पुलिस का प्रयोग अन्य तथ्य – विद्रोह के बाद संथाल परगना अधिनियम 1855 लागू, अलग प्रशासनिक इकाई का गठन |
| 1866 ई. |
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना - लन्दन (दादा भाई नौरोजी)
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| 1871 – 1872 ई. |
भारत की प्रथम जनगणना
भारत की प्रथम जनगणना 1872 में वायसराय लॉर्ड मेयो के काल में शुरू हुई, जो अनौपचारिक और गैर-समकालिक थी। हालाँकि, भारत में पहली समकालिक (नियमित) जनगणना 1881 में लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में शुरू की गई थी, जिसके बाद से यह हर 10 साल में आयोजित की जा रही है।
मुख्य तथ्य: प्रथम जनगणना (गैर-समकालिक): 1872 प्रथम नियमित/समकालिक जनगणना: 1881 नियमित अंतराल: हर 10 वर्ष में एक बार आयोजक: रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त, गृह मंत्रालय (भारत सरकार) महत्व: यह दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यासों में से एक है, जिसमें जनसंख्या, साक्षरता और अन्य सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों को एकत्र किया जाता है। |
| 1873 ई. |
सत्यशोधक समाज की स्थापना
तिथि : 24 सितंबर 1873
स्थापना स्थल - पूना (महाराष्ट्र) संस्थापक – ज्योतिराव फुले संबद्ध व्यक्तित्व – सावित्रीबाई फुले, शाहू महाराज उद्देश्य – सामाजिक समानता, जाति प्रथा का विरोध, शूद्र-अतिशूद्र उत्थान विचारधारा – सत्य, तर्क, मानवतावाद महत्व – गैर-ब्राह्मण आंदोलन की वैचारिक नींव अन्य तथ्य – धार्मिक अंधविश्वास विरोध, शिक्षा व महिला सशक्तिकरण पर बल, ब्राह्मण वर्चस्व व पुरोहितवाद का विरोध |
| 1881 ई. |
प्रथम नियमित/समकालिक जनगणना
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| 1913 – 1918 ई. |
ग़दर पार्टी की स्थापना
तिथि – 21 अप्रैल 1913
स्थापना स्थल – सैन फ्रांसिस्को (अस्टोरिया हॉल), अमेरिका संस्थापक/संबद्ध नेता – लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, कर्तार सिंह सराभा उद्देश्य – सशस्त्र क्रांति द्वारा ब्रिटिश शासन का अंत, पूर्ण स्वतंत्रता स्वरूप – प्रवासी भारतीयों का क्रांतिकारी संगठन महत्व – विदेशों से संचालित पहला संगठित भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन अन्य तथ्य – ग़दर अख़बार का प्रकाशन, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में विद्रोह का प्रयास, मुख्य आधार अमेरिका व कनाडा |
| 1914 – 1918 ई. |
इंडियन इंडिपेंडेंस कमेटी, बर्लिन
तिथि – 1914 ई.
स्थापना स्थल – बर्लिन, जर्मनी संबद्ध नेता – वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय, भूपेंद्रनाथ दत्त, लाला हरदयाल उद्देश्य – प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सहायता से भारत को स्वतंत्र कराना महत्व – विदेशों से संचालित क्रांतिकारी गतिविधियों का संगठित केंद्र स्वरूप – प्रवासी भारतीय क्रांतिकारियों का संगठन अन्य तथ्य – ग़दर आंदोलन से संबंध, जर्मन सरकार का समर्थन, ब्रिटिश विरोधी प्रचार |
| 1916 ई. |
जस्टिस पार्टी की स्थापना
एक राजनीतिक-सामाजिक संगठन था, जिसकी स्थापना 1916 ई. में मद्रास प्रेसीडेंसी (आज का तमिलनाडु क्षेत्र) में हुई।उस समय ब्राह्मण वर्ग का शिक्षा, नौकरी और राजनीति में ज़्यादा वर्चस्व था, गैर-ब्राह्मण समुदायों (दलित, पिछड़े और अन्य जातियाँ) को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा था
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| 1916 ई. |
होम रूल लीग आंदोलन
यह कोई एक पार्टी नहीं, बल्कि राजनीतिक संगठन थे।
इनका उद्देश्य जनता में राजनीतिक जागरूकता फैलाना था। मॉडल प्रेरणा: आयरलैंड का होम रूल आंदोलन। यह आंदोलन दो प्रमुख नेताओं ने चलाया - एनी बेसेंट, बाल गंगाधर तिलक |
| 1919 – 1921 ई. |
ख़िलाफ़त आंदोलन
तिथि - मार्च 1919-जनवरी 1921
संबद्ध नेता - मौलाना मोहम्मद अली, मौलाना शौकत अली, महात्मा गांधी उद्देश्य - प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के ख़लीफ़ा की रक्षा संबंध - असहयोग आंदोलन, 1920 महत्व - राष्ट्रीय आंदोलन में हिंदू–मुस्लिम एकता पतन का कारण - 1924 में तुर्की में ख़लीफ़ा पद की समाप्ति, मुस्तफा कमाल अतातुर्क |
| 1919 ई. |
जलियांवाला बाग़ हत्याकांड
तिथि – 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी)
स्थान – अमृतसर, पंजाब संबद्ध व्यक्ति – जनरल रेजिनाल्ड डायर, डॉ. सैफुद्दीन किचलू, डॉ. सत्यपाल कारण – रॉलेट एक्ट का विरोध घटना – निहत्थी भीड़ पर बिना चेतावनी गोलीबारी महत्व – राष्ट्रीय आंदोलन में निर्णायक मोड़ परिणाम – असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि जांच आयोग – हंटर आयोग |
| 1924 – 1925 ई. |
कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र मामला
तिथि – 1924 से 1925
मामला स्थल – कानपुर संबद्ध नेता – एम.एन. रॉय, मुजफ्फर अहमद, एस.ए. डांगे, शौकत उस्मानी, नलिनी गुप्ता उद्देश्य – भारत में उभरती कम्युनिस्ट गतिविधियों को दबाना आरोप – IPC धारा 121A, ब्रिटिश सम्राट को भारत से हटाने की साजिश महत्व – भारत में संगठित कम्युनिस्ट आंदोलन के विरुद्ध पहला बड़ा औपनिवेशिक मुकदमा परिणाम – डांगे, मुजफ्फर अहमद, शौकत उस्मानी, नलिनी गुप्ता को चार वर्ष का कारावास अन्य तथ्य – एम.एन. रॉय फरार, विचारधारात्मक अपराध पर मुकदमा, ब्रिटिश दमन नीति का उदाहरण |
| 1924 – 1925 ई. |
वायकोम सत्याग्रह
तिथि – 30 मार्च 1924 से 23 नवंबर 1925
आंदोलन स्थल – वायकोम, त्रावणकोर (वर्तमान केरल) संबद्ध नेता – के. केलप्पन, टी. के. माधवन, के. पी. केशव मेनन, महात्मा गांधी उद्देश्य – अछूतों को मंदिर मार्गों पर प्रवेश का अधिकार स्वरूप – अहिंसक सत्याग्रह, सामाजिक सुधार आंदोलन महत्व – भारत का पहला संगठित मंदिर प्रवेश आंदोलन परिणाम – सार्वजनिक सड़कों का आंशिक उद्घाटन अन्य तथ्य – केरल के सामाजिक सुधार आंदोलनों की आधारशिला, बाद में गुरुवायूर सत्याग्रह पर प्रभाव |
| 1926 ई. |
लेबर स्वराज पार्टी (LSP) का बंगाल पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (WPP) में परिवर्तन
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| 1926 – 1929 ई. |
नौजवान भारत सभा
तिथि – मार्च 1926 से 1929
स्थापना स्थल – लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) संस्थापक – भगत सिंह संबद्ध नेता – भगत सिंह, सुखदेव, भगवती चरण वोहरा, राम किशन, यशपाल, छबील दास उद्देश्य – समाजवादी भारत की स्थापना, ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध विचारधारा – मार्क्सवाद, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता भूमिका – HSRA का सार्वजनिक और कानूनी मंच गतिविधियाँ – युवा, मजदूर, किसान संगठन, सभाएँ, भाषण, क्रांतिकारी साहित्य महत्व – साइमन कमीशन विरोध में सक्रिय भूमिका प्रतिबंध – 1929, ब्रिटिश सरकार द्वारा अन्य तथ्य – जन आंदोलन न बन सकी, पर युवाओं का वैचारिक उग्रकरण, साम्प्रदायिकता व जमींदारी का विरोध, विरासत का स्मरण DYFI द्वारा |
| 1927 ई. |
साइमन कमीशन का गठन
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| 1928 ई. |
नेहरू रिपोर्ट
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| 1929 ई. |
केंद्रीय असेम्बली बम कांड
तिथि – 8 अप्रैल 1929
घोषणा स्थल – केंद्रीय विधान सभा, नई दिल्ली संबद्ध क्रांतिकारी – भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त उद्देश्य – दमनकारी कानूनों का विरोध, जनमत को जागृत करना नारा – इंकलाब जिंदाबाद महत्व – ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती, क्रांतिकारी विचारों का प्रचार स्वरूप – गैर-घातक बम विस्फोट, स्वैच्छिक गिरफ्तारी अन्य तथ्य – पब्लिक सेफ्टी बिल व ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल का विरोध, किसी की मृत्यु नहीं, अदालत में क्रांतिकारी नारे |
| 1929 ई. |
शारदा अधिनियम
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| 1930 ई. |
दांडी यात्रा
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| 1942 – 1944 ई. |
भारत छोड़ो आंदोलन
तिथि - 8 अगस्त 1942
घोषणा स्थल - बंबई, ग्वालिया टैंक मैदान संबद्ध नेता – महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, अरुणा आसफ़ अली नारा – करो या मरो उद्देश्य – ब्रिटिश शासन की तत्काल समाप्ति, पूर्ण स्वतंत्रता महत्व – द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि, क्रिप्स मिशन की असफलता से संबंध स्वरूप – व्यापक जन सहभागिता, भूमिगत गतिविधियाँ अन्य तथ्य – सभी प्रमुख कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी, अरुणा आसफ़ अली द्वारा कांग्रेस ध्वज फहराया गया, जन आंदोलन का तीव्र रूप, समानांतर सरकारें – बलिया, सतारा, तामलुक |
| 1946 ई. |
उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत
तिथि – 13 दिसंबर 1946
प्रस्तुतकर्ता – जवाहरलाल नेहरू प्रस्ताव – उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत (संविधान सभा में) भाव – स्वतंत्र, संप्रभु भारत की घोषणा महत्व – संविधान के मूल आदर्शों का स्रोत अन्य तथ्य – बाद में संविधान की प्रस्तावना का आधार |